शासन एवं सार्वजानिक नीति by डॉ. संजीव कुमार

(03455 reviews)
Brand
Emma

Offers


Price
Rs295.00 /pcs
Quantity
Total Price
Share

Reviews & Ratings

0 out of 5.0
(0 reviews)
There have been no reviews for this product yet.

‘शासन एवं सार्वजनिक नीति’ पुस्तक शासन व्यवस्था, प्रशासनिक प्रक्रियाओं तथा सार्वजनिक नीतियों की अवधारणा, स्वरूप और व्यावहारिक पक्ष को सरल एवं व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत करती है। यह पुस्तक विद्यार्थियों को शासन के विभिन्न आयामों, लोकतांत्रिक संस्थाओं, प्रशासनिक तंत्र, नीति निर्माण तथा जनकल्याणकारी योजनाओं को समझने में सहायता प्रदान करती है। पुस्तक में विषय को समकालीन भारतीय संदर्भों से जोड़ते हुए सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है, जिससे विद्यार्थी सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ उसके व्यावहारिक महत्व को भी समझ सकें।

इस पुस्तक में सुशासन, पारदर्शिता, जवाबदेही, नेतृत्व, जनभागीदारी, प्रशासनिक सुधार तथा सार्वजनिक नीति निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विषयों का विस्तृत अध्ययन किया गया है। साथ ही, नीति निर्माण की प्रक्रिया, उसके क्रियान्वयन, मूल्यांकन तथा समाज पर पड़ने वाले प्रभावों को भी स्पष्ट किया गया है। भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था और प्रशासन के संदर्भ में विभिन्न संस्थाओं एवं प्रक्रियाओं की भूमिका को विशेष रूप से समझाने का प्रयास किया गया है।

पुस्तक का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य विद्यार्थियों में शासन और सार्वजनिक नीति के प्रति विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण विकसित करना है। इसमें वर्तमान सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक चुनौतियों के संदर्भ में नीतियों की आवश्यकता तथा उनकी प्रभावशीलता पर भी विचार किया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप पुस्तक में विषय की समझ के साथ आलोचनात्मक चिंतन, व्यावहारिक ज्ञान और समसामयिक दृष्टिकोण को भी महत्व दिया गया है।

यह पुस्तक स्नातक स्तर के विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधार्थियों तथा शासन एवं सार्वजनिक नीति के अध्ययन में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए उपयोगी संदर्भ सामग्री के रूप में तैयार की गई है। सरल भाषा, व्यवस्थित प्रस्तुति और भारतीय संदर्भों पर विशेष ध्यान इसे अध्ययन एवं अध्यापन दोनों के लिए उपयोगी बनाता है।

Frequently Bought Products

Product Queries (0)

Login Or Registerto submit your questions to seller

Other Questions

No none asked to seller yet

What Our Customers Say